DMLT Pathshala – Lesson 4: शरीर द्रव: संरचना, वर्गीकरण और स्वास्थ्य में भूमिका
📚 अनुक्रमणिका
- परिचय
- दुबले एवं मोटे व्यक्ति में द्रव मात्रा का अंतर
- ICF और ECF क्या हैं?
- क्यों ICF और ECF के प्रतिशत TBW और TBWt में अलग होते हैं? 📘
- शरीर में ECF के 5 प्रमुख प्रकार :-
- शरीर द्रवों का विभाजन – TBW और TBWt के अनुसार 💧
- ट्रान्ससेल्युलर द्रव के छह उपविभाग
- सिरस द्रव के तीन उपविभाग
- क्या रक्त प्लाज्मा और शरीर द्रव में जल-संरचना एक जैसी है?
- शरीर द्रवों में जैविक संघटन: आर्गेनिक और इनऑर्गेनिक घटक
- निष्कर्ष
- DMLT पाठशाला क्या है? 📘
परिचय
हमारे मानव शरीर में तरल पदार्थ जीवन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। ये तरल पदार्थ विभिन्न कार्यों को संपादित करते हैं, जैसे कि पोषक तत्वों का परिवहन, अपशिष्ट पदार्थों का निष्कासन, तापमान का नियंत्रण, और कोशिकाओं के लिए उपयुक्त वातावरण प्रदान करना। मानव शरीर में कुल तरल पदार्थ की मात्रा लगभग 60% होती है, हालांकि यह उम्र, लिंग, और शरीर की संरचना के अनुसार भिन्न हो सकती है। इस लेख में, हम शरीर के तरल पदार्थों के विभाजन, पतले व्यक्ति में अधिक शरीर तरल होने के कारण, ICF और ECF के बारे में, ECF के पांच भागों, ट्रांससेलुलर द्रव के छह भागों, सेरस द्रव के तीन भागों, और शरीर के तरल में जैविक तथा अजैविक सामग्री के बारे में विस्तार से चर्चा करेंगे।
दुबले एवं मोटे व्यक्ति में द्रव मात्रा का अंतर
हमारे शरीर में तरल पदार्थ की मात्रा शरीर की संरचना पर निर्भर करती है। मांसपेशियों में वसा की तुलना में अधिक पानी होता है। इसलिए, पतले व्यक्ति, जिनमें मांसपेशियों की मात्रा अधिक और वसा की मात्रा कम होती है, उनमें शरीर तरल की मात्रा अधिक होती है। इसके विपरीत, मोटे व्यक्ति, जिनमें वसा की मात्रा अधिक होती है, उनमें शरीर तरल की मात्रा कम होती है। यह इसलिए है क्योंकि वसा कोशिकाओं में पानी की मात्रा कम होती है, जबकि मांसपेशी कोशिकाओं में पानी की मात्रा अधिक होती है। इस तरह, शरीर की संरचना तरल पदार्थों के प्रतिशत को प्रभावित करती है।
ICF और ECF क्या हैं?
शरीर के तरल पदार्थों को मुख्य रूप से दो भागों में विभाजित किया जाता है: इंट्रासेलुलर फ्लूइड (ICF) और एक्स्ट्रासेलुलर फ्लूइड (ECF)।
इंट्रासेलुलर फ्लूइड (ICF)
यह द्रव्य कोशिकाओं के भीतर उपस्थित होता है और कुल शरीर द्रव्य (Total Body Water) का लगभग 55% तथा कुल शरीर भार (Total Body Weight) का लगभग 40% बनाता है। ICF कोशिका झिल्ली द्वारा सुरक्षित रहता है और इसमें पोटैशियम (K⁺), मैग्नीशियम (Mg²⁺), फॉस्फेट (PO₄³⁻), प्रोटीन, ग्लूकोज तथा एंजाइम्स घुले रहते हैं। Na⁺/K⁺-ATPase पम्प द्वारा इसकी आयनिक संरचना नियंत्रित रहती है। यह द्रव्य कोशिकीय श्वसन, प्रोटीन संश्लेषण और ऊर्जा उत्पादन जैसे महत्वपूर्ण जैविक कार्यों का मंच है।
एक्स्ट्रासेलुलर फ्लूइड (ECF)
ECF कोशिकाओं के बाहर स्थित द्रव्य है जो कुल शरीर द्रव (Total Body Water) का लगभग 45% तथा कुल शरीर भार (Total Body Weight) का लगभग 20% बनाता है। इसका मुख्य संघटन सोडियम (Na⁺), क्लोराइड (Cl⁻) और बाइकार्बोनेट (HCO₃⁻) होता है। इसे पाँच भागों में वर्गीकृत किया गया है: अंतराली द्रव्य, प्लाज़्मा, ट्रांससेल्युलर द्रव्य, अस्थि द्रव्य और उपास्थि द्रव्य।
क्यों ICF और ECF के प्रतिशत TBW और TBWt में अलग होते हैं? 📘
शरीर द्रव के वितरण को दो प्रकार से मापा जाता है:
- Total Body Water (TBW): यह शरीर में मौजूद कुल जल मात्रा का प्रतिशत होता है।
- Total Body Weight (TBWt): यह द्रवों का प्रतिशत शरीर के कुल वजन के सापेक्ष होता है।
अब समझिए:
ICF शरीर में मौजूद कुल जल का लगभग 55% होता है, लेकिन जब इसे शरीर के कुल भार से मापा जाए तो यह लगभग 40% होता है।
ECF कुल जल का लगभग 45% होता है, लेकिन शरीर के भार के हिसाब से लगभग 20% होता है।
यह अंतर क्यों?
- शरीर का एक बड़ा हिस्सा पानी होता है (~60% पुरुषों में, ~50-55% महिलाओं में), और इसी जल को TBW कहा जाता है।
- लेकिन शरीर का पूरा वजन सिर्फ पानी से नहीं बना होता — इसमें हड्डियाँ, वसा, मांसपेशियाँ, ऊतक आदि भी शामिल होते हैं।
- जब आप द्रवों को सिर्फ "जल" के रूप में देखते हैं, तो ICF अधिक (55%) लगता है। लेकिन जब पूरे वजन के आधार पर आँकते हैं, तो उसका प्रतिशत कम (40%) हो जाता है।
👉 इसीलिए, दोनों प्रतिशत सही होते हैं — बस संदर्भ (reference point) अलग होता है।
शरीर में ECF के 5 प्रमुख प्रकार :-
मानव शरीर में पाए जाने वाले एक्स्ट्रासेल्युलर फ्लूइड (ECF) को पाँच मुख्य भागों में वर्गीकृत किया गया है। यह विभाजन शरीर के द्रवों की संरचना और कार्यों को समझने में मदद करता है। नीचे प्रत्येक भाग का कार्य और TBW व TBWt के अनुसार उनका योगदान बताया गया है।
1. इंटरस्टिशियल फ्लूइड (Interstitial Fluid)
यह ऊतकों (tissues) के बीच पाया जाने वाला तरल है जो कोशिकाओं को पोषक तत्व और ऑक्सीजन पहुंचाता है और अपशिष्ट उत्पादों को वापस रक्त में स्थानांतरित करता है। यह ECF का सबसे बड़ा भाग है।
2. प्लाज्मा (Plasma)
यह रक्त का तरल घटक है जिसमें RBCs, WBCs, और प्लेटलेट्स तैरते हैं। यह शरीर के विभिन्न भागों में पोषक तत्व, हार्मोन, गैसें और अपशिष्ट ले जाने का कार्य करता है।
3. हड्डियों में द्रव (Fluid of Bones)
यह तरल हड्डियों के भीतर की संरचनाओं में मौजूद होता है, जो ऑस्टियोसाइट्स को पोषण प्रदान करता है और हड्डियों की मजबूती बनाए रखता है।
4. कोंड्रोसाइट्स का द्रव (Fluid in Chondrocytes)
यह तरल उपास्थि (cartilage) कोशिकाओं के बीच पाया जाता है और जोड़ों में कुशन की तरह कार्य करता है। यह घर्षण को कम करने और लचीलापन बनाए रखने में सहायक होता है।
5. ट्रांससेलुलर फ्लूइड (Transcellular Fluid)
यह विशेष तरल शरीर की विशिष्ट गुहाओं जैसे सेरेब्रोस्पाइनल फ्लूइड, नेत्र द्रव, पाचन रस, सायनोवियल द्रव, सीरस द्रव आदि में पाया जाता है। यह विशेष कार्यों के लिए जिम्मेदार होता है।
शरीर द्रवों का विभाजन – TBW और TBWt के अनुसार 💧
द्रव भाग | TBW (%) | TBWt (%) | टिप्पणी |
---|---|---|---|
ICF | 55% | ~40% | कोशिकाओं के भीतर का द्रव |
ECF | 45% | ~20% | कोशिकाओं के बाहर का द्रव |
↳ Interstitial Fluid | 20% | ~9% | कोशिकाओं के बीच पाया जाता है |
↳ Plasma | 7.5% | ~3.5% | रक्त का तरल भाग |
↳ Fluid of Bones | 7.5% | ~3.5% | हड्डियों के अंदर का द्रव |
↳ Chondrocyte Fluid | 7.5% | ~3.5% | उपास्थि कोशिकाओं के आसपास का द्रव |
↳ Transcellular Fluid | 2.5% | ~1.5% | विशेष अंगों और गुहाओं में |
ट्रान्ससेल्युलर द्रव के छह उपविभाग
क. मस्तिष्कमेरु द्रव (Cerebrospinal Fluid, CSF)
CSF लगभग 140 mL मात्रा में होता है और चौथे वेंट्रिकल की कोरॉइड पेक्सस में निर्मित होता है। यह मस्तिष्क व स्पाइनल कॉर्ड को यांत्रिक सुरक्षा, पोषण तथा वेस्ट-कम्पार्टमेंट क्लियरेंस प्रदान करता है। CSF का दबाव 10–18 cm H₂O (लेटिंग पोज़िशन) सामान्य माना जाता है। डायग्नोस्टिक लम्बर पंक्चर व द्रव विश्लेषण कई न्यूरोइन्फेक्शन, सबएरैक्नॉइड हेमरेज और मलिग्नेंसी का आकलन करता है।
ख. अन्त्रह्नदृष्टि द्रव (Intraocular Fluid)
ऐक्वस व विट्रियस ह्यूमर के रूप में लगभग 4 mL द्रव नेत्रगोलक में उपस्थित रहता है। इनका निर्माण सिलीअरी प्रक्रियाओं द्वारा होता है और इन्ट्राऑक्युलर प्रेशर (IOP) को 10–21 mm Hg सीमा में रखता है। IOP बढ़ने पर ग्लॉकोमा का खतरा होता है; इसलिए कार्बनिक एन्हाइड्रेस इन्हिबिटर, पीजीएनलॉग, बीटा-ब्लॉकर आदि दवाओं का उपयोग किया जाता है।
ग. पाचन रस (Digestive Juice)
मुख, जठर, यकृत, अग्न्याशय, आन्त्र आदि से विभिन्न एंज़ाइमिक रस स्रावित होते हैं। ये रस प्रतिदिन 6–8 लीटर तक बन सकते हैं और पाचन, अम्ल-क्षारीय संतुलन, श्लेष्मिक सुरक्षा में योगदान देते हैं। उल्टी या डायरिया में इन रसों की अत्यधिक हानि से गंभीर इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन व मेटाबोलिक अल्कलोसिस/एसिडोसिस हो सकता है।
घ. सायनोवियल द्रव (Synovial Fluid)
धार्मिक द्रव (Viscous) यह द्रव जोड़-गुहा में स्थित रहता है। हायलूरोनिक एसिड व लुब्रिसिन इसकी चिकनाई तथा न्यूट्रोफिल फ़ैगोसाइटिक कार्य सुनिश्चित करते हैं। ऑस्टियोआर्थ्राइटिस में इसकी श्यानता घटती है, जबकि सेप्टिक आर्थ्राइटिस में श्वेत रक्तकोशिकाएँ बढ़ जाती हैं।
ङ. मूत्र-मार्गीय द्रव (Fluid of Urinary Tract)
किडनी फिल्ट्रेट (180 L/दिन) आरंभिक रूप से अल्ट्राफिल्ट्रेट होता है, जिसका 99 % पुन: अवशोषित हो जाता है। शेष 1–2 लीटर मूत्र के रूप में बाहर निकलता है। यह द्रव शरीर को अपशिष्ट (Urea, Creatinine, Drug Metabolites) व अतिरिक्त जल, इलेक्ट्रोलाइट से मुक्त करता है।
च. सिरस द्रव (Serous Fluid)
यह शारीरिक गुहाओं में महीन झिल्ली (Serosa) द्वारा उत्पादित अल्प मात्रा का पारदर्शी द्रव है, जो अवयवों को घर्षण से बचाता है। सिरस द्रव को तीन वर्गों में पुनर्विभाजित किया जाता है: इन्ट्राप्ल्यूरल, पेरिकार्डियल, तथा पेरिटोनियल द्रव।
सिरस द्रव के तीन उपविभाग
१. इन्ट्राप्ल्यूरल द्रव
फेफड़ों और वक्ष-पात्र भित्ति के मध्य 10–20 mL चिकना द्रव होता है, जो नेगेटिव प्रेशर (-5 cm H₂O) बना कर फेफड़ों को फुलाए रखता है। प्ल्यूरल इफ्यूज़न, न्यूमोथोरैक्स जैसे विकारों में यह द्रव रोगात्मक रूप से बढ़ या घट सकता है।
२. पेरिकार्डियल द्रव
हृदय को घेरने वाली डबल-लेयर्ड थैली के बीच 15–50 mL द्रव पाया जाता है। यह हृदय की गतिशीलता को सुचारु रखता है। पेरिकार्डियल टैम्पोनैड में यह द्रव 200 mL से अधिक हो कर हेमोडायनामिक कम्प्रोमाइज़ का कारण बन सकता है, जिसका आपातकालीन उपचार पेरिकार्डियोसेंटेसिस है।
३. पेरिटोनियल द्रव
पेट की गुहा में 50–100 mL तरल पदार्थ अंगों के बीच सरकन (Gliding) सुविधा देता है। यकृत रोगों में पोर्टल हाइपरटेंशन के कारण यह द्रव लीटरों में बढ़ कर असाइटिस उत्पन्न कर सकता है। तनावयुक्त असाइटिस में एल्ब्यूमिन-सपोर्टेड पैरासेन्टेसिस या TIPSS की आवश्यकता हो सकती है।
क्या रक्त प्लाज्मा और शरीर द्रव में जल-संरचना एक जैसी है?
हमारे शिक्षक द्वारा बताए गए दोनों बिंदु सही हैं, लेकिन वे दो अलग-अलग संदर्भों को दर्शाते हैं:
1️⃣ रक्त (Blood) का विभाजन:
रक्त दो प्रमुख भागों में बाँटा जाता है:
- रक्त प्लाज्मा (Plasma) – 55%
- रक्त कोशिकाएँ (RBC, WBC, Platelets) – 45%
रक्त प्लाज्मा के अंदर फिर से तीन भाग माने जाते हैं:
- जल (Water): लगभग 90–92%
- घुलित ठोस पदार्थ: (Proteins, Electrolytes, Nutrients, Waste) लगभग 8%
- घुली गैसें: (O₂, CO₂ आदि) <1%
👉 यह आंकड़े केवल रक्त के तरल हिस्से (Plasma) की रचना को दर्शाते हैं।
2️⃣ शरीर द्रव (Body Fluid) का विभाजन:
शरीर द्रव यानी शरीर में मौजूद सभी द्रवों (ICF + ECF) को जब मिलाकर देखा जाता है, तब भी मुख्यतः दो भागों में विभाजन होता है:
- जल (Water): 90–92%
- ठोस घुलित पदार्थ: लगभग 8%
👉 यहां यह विभाजन सभी प्रकार के शरीर द्रवों का औसत रासायनिक संघटन दिखाता है, न कि सिर्फ रक्त या प्लाज्मा का।
🔍 तो क्या अंतर है?
बिंदु | रक्त प्लाज्मा | शरीर द्रव |
---|---|---|
संदर्भ | केवल रक्त के तरल भाग की बात | पूरे शरीर के सभी द्रवों की बात |
उदाहरण | Plasma (रक्त का हिस्सा) | ICF, ECF, Lymph, CSF, Synovial आदि |
घुलित गैसें | शामिल होती हैं (<1%) | अक्सर सामान्यीकृत नहीं की जाती |
दोनों ही 90–92% जल और 8% घुलित पदार्थ बताते हैं, लेकिन एक रक्त के प्लाज्मा के संदर्भ में है और दूसरा संपूर्ण शरीर द्रवों के रासायनिक संघटन के रूप में।
इसलिए वे एक जैसे दिखते हैं, पर संदर्भ अलग होने के कारण उपयोग में भिन्न हैं।
शरीर द्रवों में जैविक संघटन: आर्गेनिक और इनऑर्गेनिक घटक
अजैविक पदार्थ:
- इलेक्ट्रोलाइट्स: Na⁺, K⁺, Ca²⁺, Mg²⁺, Cl⁻, HCO₃⁻, PO₄³⁻
- गैसें: O₂, CO₂, N₂
- आस्मोलैरिटी: लगभग 300 mOsm/L
जैविक पदार्थ:
- प्रोटीन्स: एल्ब्यूमिन, ग्लोब्युलिन, फाइब्रिनोजेन
- कार्बोहाइड्रेट्स: ग्लूकोज
- लिपिड्स: फैटी एसिड्स, ट्राइग्लिसराइड्स, कोलेस्ट्रॉल
- हार्मोन्स, एंजाइम्स, यूरिया, क्रिएटिनिन
🔎 महत्त्वपूर्ण जानकारी (Revision Box)
- ICF में अधिक मात्रा में पाए जाने वाले इलेक्ट्रोलाइट्स: पोटैशियम (K⁺), मैग्नीशियम (Mg²⁺), फॉस्फेट (PO₄³⁻)
- ECF में अधिक मात्रा में पाए जाने वाले इलेक्ट्रोलाइट्स: सोडियम (Na⁺), क्लोराइड (Cl⁻), बाइकार्बोनेट (HCO₃⁻)
- ICF का pH: लगभग 7.0 (थोड़ा अम्लीय)
- ECF का pH: लगभग 7.4 (सामान्य क्षारीय)
निष्कर्ष
शरीर द्रव्यों का सूक्ष्म विभाजन (ICF, ECF, ट्रांससेल्युलर द्रव) और उनमें घुले कार्बनिक-अकार्बनिक पदार्थ जीवन के प्रत्येक पहलू को संचालित करते हैं। इनका संतुलन (होमियोस्टेसिस) स्वास्थ्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। चिकित्सा विज्ञान में द्रव प्रबंधन, इलेक्ट्रोलाइट थेरेपी और नैदानिक जाँचों के लिए इनकी समझ आवश्यक है।
DMLT पाठशाला क्या है? 📘
DMLT पाठशाला एक शैक्षणिक श्रृंखला है जहाँ हम डिप्लोमा इन मेडिकल लैब टेक्नोलॉजी (DMLT) से जुड़े सभी विषयों को आसान और सरल हिंदी भाषा में समझाते हैं।
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